देहरादून में दो मंच, एक संदेश : चुनावी माहौल में युवाओं पर सियासी नजर
देहरादून में दो मंच, एक संदेश : चुनावी माहौल में युवाओं पर सियासी नजर

उत्तराखंड में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रदेश का सियासी पारा भी चढ़ने लगा है। राजनीतिक दल विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के जरिए देवभूमि के युवाओं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
शुक्रवार को देहरादून में दो बड़े कार्यक्रम एक साथ चर्चा का केंद्र बने। एक ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित हुआ, जबकि दूसरी ओर ‘धुरंधर फेम जैस्मिन’ का लाइव कान्सर्ट हुआ। दोनों आयोजनों का उद्देश्य और स्वरूप अलग-अलग था, लेकिन दोनों में युवाओं की अच्छी-खासी मौजूदगी देखने को मिली। भीड़ के लिहाज से भी दोनों कार्यक्रम लगभग बराबरी पर नजर आए।

इन कार्यक्रमों के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को महज राजनीतिक प्रदर्शन और ड्रामा बताया, तो कुछ ने जैस्मिन के कान्सर्ट को लोक संवर्धन पर्व के दौरान लोक संस्कृति के साथ असंगत बताया। वहीं, कई युवाओं को राहुल गांधी के कार्यक्रम से जिस गंभीर संवाद और ठोस संदेश की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। यह भी उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम से एक दिन पहले कांग्रेस ने अपने एक सक्रिय कार्यकर्ता को खो दिया था।
अब सवाल यह उठता है कि क्या इस तरह के आयोजन उत्तराखंड जैसे शिक्षित राज्य के युवाओं को वास्तव में प्रभावित कर पाते हैं, या फिर राजनीतिक दलों के लिए उल्टा असर छोड़ते हैं। देहरादून में एक ही दिन इन दोनों कार्यक्रमों का होना अपने आप में एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। आखिरकार, प्रदेश के करीब 17 लाख युवा मतदाता ही आगामी विधानसभा चुनाव में नई सरकार चुनने में अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे में युवाओं की सोच, उनकी प्राथमिकताएं और उनकी भागीदारी चुनावी राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रही है।

